मुझे पता है

सतीश गणवीर

 

जीवन से मुझे क्या चाहिए? यह मुझे निश्चित पता है |

मेरा जीवन और मेरी भावनाएं, बस येही हैं, जिनके प्रति मैं सचेत हूँ |

येही वजह है कि मैं जीवन की चेतना को बेहद प्यार करता हूँ

और इन्हें हासिल करने के लिए मुझे कोई कसार बाकी नहीं रखना है |

येही मुझे पता है | येही मुझे पता है | येही मुझे पता है |

 

किन्तु हर किसी के जीवन की अवधि बड़ी सीमित है |

मृत्यु के पश्चात क्या? यह किसी को नहीं पता |

और ना ही मुझे उसकी परवा करनी है |

येही मुझे पता है | येही मुझे पता है | येही मुझे पता है |

 

मैं अपने जीवन की मात्रा या अवधि तोह बढ़ा नही सकता,

किन्तु अपने जीवन की तीव्रता बढ़ाकर जीने की कोशिश करूंगा |

येही मुझे पता है | येही मुझे पता है | येही मुझे पता है |

 

मेरे जीवन में कला, संगीत, कविता इत्यादी जो उच्च भी हैं,

उसका बस येही उद्येश्य है की मुझे मेरी चेतना और जीवन की तीव्रता को

गति देकर इसे आगे बढ़ाना है |

येही मुझे पता है | येही मुझे पता है | येही मुझे पता है |

 

About The Poem:

This poem is based on a letter Dr. Homi Bhabha wrote to Mrs. Jessie Maver (one of his most trusted friends) on December 8, 1934. The tone and content of the letter strongly reflect his intensity and passion for anything he chose to pursue.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s